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क्या है पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस( PCOS)

क्या है पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस

फास्ट लाइफ स्टाइल के कारण आजकल हमारे जीवन में बेहद जल्दी परिवर्तन आ रहे है। हमारा हर दिन एक नया मोड़, नयी चुनौती ले के आता है। कभी काम के सिलसिले में तो कभी पार्टी करने के लिए हम लेट नाईट तक जागते है, हमारी खाने पीने की आदतें बदल गई है, शारीरिक श्रम कम हो गया है इन बदलाव के कारण हमारे स्वास्थ्य पर असर दिखता है और हम कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते है। अगर हम महिलाओं के परिपेक्ष्य में बात करें तो इस स्थिति में वे भी कई शारीरिक समस्याओं का सामना करती हैं, उनमें से एक है पीसीओएस, जो आज के समय में बड़े पैमाने में देखाई दिया जाता है। 

पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी कि PCOS सामान्यतः महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है। कुछ समय पहले तक यह समस्या 30 से 35 साल तक की महिलाओं में देखी जाती थी पर अब 15 से 44 साल तक की महिलाओं में भी PCOS देखा जाता है। यह एक प्रकार का लाइफस्टाइल डिसऑर्डर है जिसकी वजह से महिला के शरीर में कुछ होर्मोन्स असंतुलित हो जाते है। महिलाओं के मासिक चक्र के लिए दो होर्मोन महत्वपूर्ण होते है एक है पुरुष लाक्षणिकता वाले एन्ड्रोजन और महिला लाक्षणिकता वाले प्रोजेस्ट्रेरोन। जब एक महिला के शरीर में एन्ड्रोजन का प्रमाण प्रोजेस्टेरोन कहीं ज्यादा बढ़ जाता है तब महिला PCOS का शिकार होती है। इस हार्मोनल परिवर्तन के कारण महिलाओं की ओवरी यानी कि अंडाशय में बहुत सारे छोटे छोटे सिस्ट हो जाते है और मासिक में अनियमितता देखने को मिलती है। इस के अलावा भी महिलाओं में कुछ शारीरिक और मानसिक परिवर्तन आता है जिसे आज हम विस्तार पूर्वक जानगें ।

PCOS के लक्षण

 

  • अनियमित मासिक चक्र

जिन महिलाओं को PCOS होता है उनका मासिक चक्र धीमा होता है और उन्हे एक साल में 9 बार ही मासिक दिखता है। साथ ही कुछ महिलाओं में अधिक रक्तस्त्राव की समस्या देखने को मिलती है।

 

  • बढ़ता हुआ वज़न

होर्मोनल असंतुलन के कारण महिलाओं के वज़न में बेहद जल्दी परिवर्तन देखने को मिलता है। बहुत कम समय में महिलाओं का वज़न काफ़ी बढ़ जाता है। अगर आपको लगता है की आपका वज़न बहुत जल्दी से बढ़ रहा है तो आपको अपने डॉक्टर से बात करने की आवश्यकता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि आपका वज़न PCOS के कारण ही बढ़ रहा हो पर आप अपने बढ़ते हुए वज़न को नज़रअंदाज ना करें।

 

  • अनचाहे बाल

शरीर में एन्ड्रोजन होर्मोन बढ़ने कारण महिलाओं में PCOS की समस्या होती है। इस वजह से महिलाओं के चेहरे पर और शरीर के अन्य भाग पर बाल उगने लगते है।

 

  • स्वभाव में परिवर्तन

जो महिला PCOS का समाना कर रही है उनके स्वभाव में भी बहुत प्रकार के परिवर्तन देखने को मिलते है। थोड़े से भी मुश्किल हालात में ये महिलाएं बहुत जल्दी चीड जाती है, गुस्सा करने लगती है, कभी कभी वे काफ़ी लंबे समय तक चिंता में डुबी रहेती है, तो कभी बहुत जल्दी ही भावुक हो जाती है। इन मानसिक परिवर्तन के कारण कुछ महिलाओं में तेज़ सिर दर्द से परेशान रहेती है।

   

  • मुंहासे 

शरीर में एन्ड्रोजन होर्मोन बढ़ने के कारण महिलाओं की त्वचा पुरुषों के समान तैलीय हो जाती है इस वज़ह से महिलाओ को बार बार मुंहासे होते है।

 

  • कम नींद आना

पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का सबसे सामान्य लक्षण है नींद न आना। कभी महिला ठीक से सो नहीं पाती और उठने के बाद भी उन्हे थकान महसूस होती है। अगर आपको नींद नहीं आती तो आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है आप अपने डॉक्टर से चेकअप जरूर करवाएं क्योंकि हो सकता है कि आप किसी और शारीरिक समस्या से जूझ हो।

ऐसे तो यह एक लाइफस्टाइल डिजीज है जो कि अनियमित जीवन पद्धति, जीवन में ज़्यादा तनाव से होता है। कुछ किस्सों में यह समस्या अनुवांशिक भी हो सकती है तो अगर आपके परिवार में किसी को अनियमित मासिक, PCOS या अन्य कोई बीमारी है और आप को भी ऐसी कोई समस्या हो सकती है तो अगर आप उपरोक्त लक्षण का सामना कर रहें हो तो  आप अपने डॉक्टर या गायनेकोलॉजिस्ट को संपर्क जरूर करें।  

 PCOS से कैसे बचे ?

 

अगर आपको  PCOS के लक्षण दिख रहें है तो यह बेहद महत्वपूर्ण है की आप तुरंत ही अपने डॉक्टर की सलाह ले और अपना इलाज शुरू करें । इस के अलावा आपकी जीवनशैली में भी परिवर्तन बेहद महत्वपूर्ण है। यह कुछ बाते हैं जिनका आपको ध्यान रखना है जिससे की आप स्वस्थ जीवन को अपना सकें ।

 

  • अपने बढ़ते हुए वजन को रोके

अगर आपका बीएमआई सामान्य से ज़्यादा है तो आप तुरंत ही अपने बढ़ते वज़न को रोकने की कोशिश करें क्योंकि बढ़ता हुआ वज़न कई समस्याओं को साथ लाता है जिनमें से एक है PCOS। PCOS के कारण, वज़न काफ़ी तेजी से बढ़ता है और इस वजह को से बढ़ते हुऐ वजन को रोकना जरूरी हे।  

  • नियमित व्यायाम करें 

व्यायाम करने से हमारा वज़न कम होता है।  इस के साथ साथ जीवन में नियमितता आती है, हम उर्जावान बनते है और हमारे जीवन में तनाव को कम होता है।  

  • हेल्दी डाइट अपनाएं 

PCOS होने के कारण वज़न बढ़ जाता है, उसे कम करने लिए हमेशा हेल्दी डाइट जरूरी है। आप किसी अच्छे डायटीशियन का संपर्क करें ।

 

पीसीओएस का इलाज, निंबा के साथ

अगर आप ऐसी किसी भी लाइफ स्टाईल डिसोर्डर से जूझ रही है तो निंबा नेचर क्यॉर विलेज इसमें आपकी सहायता कर सकता है। निंबा में विविध प्रकार के योगा सेशन्स होते है जो आपके तनाव को कम करेगा साथ में पीसीओएस के लक्षण कम करने में मदद कर सकता है।  साथ ही यहॉं कई होलिस्टिक थेरेपीज है जो आपको पीसीओएस से निजात दिलवाने में मदद कर सकता है। अगर आप ऐसी किसी भी समस्या से जूझ रही है तो आप 15 दिन के लिए निंबा में प्रकृति के बीच रहिए और यहॉं की प्राकृतिक जीवन पद्धति को अपनाएं जिससे आपके जीवन में तो काफ़ी बदलाव आएगा साथ ही आपकी शारीरिक स्थिति में भी काफ़ी सुधार होगा।

 

  

FAQs

 

पीसीओएस क्या है

“पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम” यानी पीसीओएस एक लाइफ स्टाईल डिसऑर्डर है। इस शारीरिक अवस्था में शरीर में एन्ड्रोजन होर्मोन बढ़ जाता है। यह एक पुरुष लक्षण वाला  होर्मोन है। जिससे महिला के शरीर में कई परिवर्तन देखे जाते है। साथ ही महिलाओं के मासिक में भी अनियमितता देखी जाती है।  

 

पीसीओएस लक्षण उपचार

जिनको पीसीओएस होता है उन महिलाओं में मुख्य रूप से यह तकलीफे देखी जाती है।   

वज़न का बढ़ना

स्वभाव में परिवर्तन

बार बार मुंहासे होना

नींद कम आना

अनचाहे बाल उगना

जो महिलाएं पीसीओएस से जूज रही है, उन्हे यह रास्ते अपनाने चाहिए

अपनी लाइफस्टाइल में परिवर्तन लाएं

हेल्दी डाइट अपनाएं

नियमित व्यायाम करे

शराब और सिगरेट से दूर रहें

 

 

पीसीओएस व्यायाम

जिन महिलाओं को पीसीओएस होता है उनके शरीर में होने वाले होर्मोनल परिवर्तन के कारण उनका वजन काफ़ी तेजी से बढ़ने लगता है। उनके लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है की वे अपने बढ़ते हुए वज़न को रोके। नियमित व्यायाम करने से उनका बढ़ता हुआ वज़न तो कम होता है साथ ही उनके कुछ अंगों को भी फायदा होता है, व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है, नई ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए पीसीओएस हो उन महिलाओं को हर रोज 30 मिनट का नियमित वर्कआउट करना चाहिए जिसमें जॉगिंग, तेज चलना या

गर्मीयों में इन योग से खुद को रखें ठंडा

योग

गर्मीयों का मौसम आ रहा है, अब धीरे धीरे हमारे आसपास के वातावरण का तापमान बढ़ रहा है। इन परिस्थिति में हीट स्ट्रोक, सनबर्न, डीहाईड्रेशन होता है जिससे हमारे शरीर में उर्जा का स्तर बेहद जल्दी कम हो जाता है। साथ ही बेचेनी, घबराहट और उल्टी – दस्त जैसी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती है। ऐसे में यह बेहद जरूरी होता है की अब आप अपने स्वास्थ्य के बारे में जागृत रहें। अपने खान पान में ऐसी चीज़ो का समावेश करें जो आपके शरीर को ठंडा रखे और गरमी का प्रकोप कम करें, साथ ही ऐसी गर्मीओं में कुछ ख़ास प्रकार के योग करने से भी शरीर को शीतलता प्राप्त होती है तो इस मौसम में ऐसी जीवन पद्धति अपनाएं जिससे गर्मी की असर से आप कम आहत हो। 

एक अच्छी जीवन पद्धति के लिए खानपान की आदतें बेहद महत्वपूर्ण है और जब बात गर्मीओं की आती है तब खाने पीना के ध्यान रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकी आपकी कुछ आदतें आपको तकलीफों से बचा सकती है। गर्मीयों में हो सके वहॉं तक तरबूज, खरबूजे, लौकी, खीरा और खट्टे फलों का प्रयोग करें, इन पदार्थो के सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। इस के साथ साथ पेय पदार्थ जैसे पानी, छाछ, ग्लुकोज, नारियल पानी का प्रयोग ज़्यादा करें इससे शरीर में पानी की मात्रा संतुलित रहती है और आपके शरीर ठंडक बनी रहेती है। जैसे खाद्य पदार्थो से मनुष्य खुद के शरीर के तापमान को ठंडा रख सकता है वैसे है योगाभ्यास से भी इन्सान शरीर का तापमान कम रख सकता है। तो आइए आज हम  गर्मीओं में किए जाने वाले कुछ खास प्रकार के योगासनो के बारे में विस्तार से चर्चा करते है।

 सर्दीओं के प्रमाण में गर्मी के मौसम में हमारा शरीर ज्यादा एक्टिव रहेता इस का अर्थ यह है की थोडे से शारीरिक व्यायम से हमारा शरीर वार्मअप हो जाता है। इस लिए तो थोड़े से शारीरिक व्यायाम या योग से ही आपको अच्छे परिणाम मिल सकते है।

सबसे पहले हम बात करते है प्राणायाम के बारे में, प्राणायाम से मनुष्य को श्वसन संबधित तकलीफों से तो छुटकारा प्राप्त कर सकता है साथ ही शरीर में ठंडक बनाए रखने के लिए

 

भी यह बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। उसमें भी सबसे पहले आता है शीतली प्राणायाम।

 

शीतली प्राणायाम – इस प्राणायाम से शरीर में ऑक्सिजन का प्रमाण सामान्य रहेता है। 

  • सबसे पहेले आप अपने  हाथों को घुटनों पर रखकर सुखासन या पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाए। अपनी जीभ को बाहर निकलें ।
  • जीभ के दोनों किनारों को जोड़े इससे आपकी जीभ ट्यूब या स्ट्रॉ के आकार में बनेगी। 
  • इस के बाद मुंह से सांस ले उसके बाद नाक से सांस छोड़ें।
  • इस प्राणायाम को कम से कम 10 बार दोहराएं। 
  • इस आसन से आपका मन स्थिर होगा और शरीर ठंडा रहेगा। 
  • इस बात का ध्यान राखें की गार्डन के पास या जहॉं ठंडी – ताजी हवा चलती हो, वहॉं यह प्राणायाम करने से आपको स्वास्थ्य लाभ अधिक होगा।

 

शितकारी प्राणायाम के अलावा भ्रामरी प्राणायाम भी आपके स्वास्थ्य के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है ।

 

भ्रामरी प्राणायाम – सबसे पहले आप शांत और अच्छी हवादार जगह पर  सुखासन और पद्मासन की स्थिति में बैठ जाइए।

  • अपनी तर्जनी को दोनों कान पर रखें।
  • अपने मुख को बंध रखते हुए सांस ले और छोड़े।
  • जब सांस छोड रहे है तो ऊँ शब्द का या म शब्द का उच्चारण करें।
  • यह प्रक्रिया 5 से 7 बार दोहराए 

 

मंडूकासन विधि – 

  • सबसे पहले आप वज्रासन की मुद्रा में बैठे। 
  • अपनी दोनो हाथ की मुठ्ठी को बंध करे और मुठ्ठी को अपनी नाभि के पास लाएं।
  • मुठ्ठी को नाभि से नीचे ऐसे रखें कि जैसे की मुट्ठी खड़ी हो और ऊँगलियाँ आपके पेट की तरफ रहे।
  • धीरे से सांस ले और छोडे. सांस छोड़ ते हुए आगे की तरफ नीचे झुके।
  • आपकी जांघ जमीन पर टिकी रहै उस बात का ध्यान रखें। 
  • जब आप आगे जुके तब ध्यान रखें की आपकी नाभी पर दबाव पड़े।
  • धीरे धीरे सांस लेते हुए यथासंभव इस स्थिति को बनाये रखें।
  • फिर सांस लेते हुए अपनी सामान्य अवस्था वापस आएं और आराम करें।
  • इस आसन को प्रतिदिन 5 से 10 बार करे।

 

 

शवासन – गर्मीओं में शरीर का तापमान बढ जाता है साथ ही व्यायाम करने के बाद हमे थकान होती है, शरीर में उर्जा के साथ साथ गरमी का प्रमाण भी बढ़ जाता है। वैसी स्थिति में शरीर को शांत करने के लिए शवासन बेहद उपयोगी साबित होता है। 

  • किसी भी शांत जगह पर जमीन पर पीठ के बल लेट जाइए अपने दोनो पैरो के बीच देठ फीट का अंतर रखे।
  • अपने शरीर को ढीला छोड़ दे, ऑंखो को से बंध कर ले।
  • आप धीरे धीरे से अपने सॉंस ले और छोड़े।
  • मन चल रहे विचारों को रोके और ध्यान केन्द्रित करने का प्रयत्न करे। 
  • अगर आपको लगे कि आपका ध्यान भटक रहा है तो आप गिनती कर सकते है।
  • शवासन के करते समय आप सुधिंग म्युजिक बजाना चाहे तो बजा सकते है यह आपके मन को शांत करने में मदद करता है।

 

यह कुछ योग आसान के तरीके है जिससे आप गर्मीयों में अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते है। हर व्यक्ति के शरीर का प्रकार अलग होता है अगर आप इस विषय में ज्यादा जानना चाहते है तो आप नींबा नेचर क्यॉर विलेज आ सकते है, जो आपको इस विषय में ज़्यादा जानकारी देने में समर्थ है। यहाँ आपको प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार खानपान की आदतों के बारे में विस्तार से बताया जाता है। खाने के साथ साथ कौन से व्यायाम और प्राकृतिक पद्धतियों से आप अपने स्वास्थ्य को और बहेतर बना सकते है इस विषय में भी जानकारी दी जाएगी।

 

 

FAQ

Q) योग के उद्देश्य ?

 अगर हम योग शब्द की बात कर रहे है तो भारतीय संस्कृति में योग शब्द के कई प्रयोग मिलते है। उसमें से एक प्रयोग ऐसा है जो हमारे लिए आध्यात्मिक और शारिरीक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण है। योग से हम कई शारीरिक तकलीफों से मुक्ति पा सकते है और शारीरिक क्षमताए विकसित भी होती है। तनाव से मुक्ति मिलती है और मानसिक शांति मिलती है। अलग अलग मौसम में कुछ खास प्रकार के योग करने से भी शारीरिक तकलीफे कम होती है। जैसे गर्मीओं में  प्राणायाम, मंडूकासन और शवासन जैसे योग करने से शरीर की गरमी कम होती है और शरीर में नई उर्जाका संचय होता है।

 

 

Q) योग से लाभ और हानि  ?

योग से हमें कई फायदे होते है जैसे की शारीरिक, मानसिक इत्यादि। जैसे की नियमित रूप से योग करने से हमें लचक प्राप्त होती है, शारीरिक क्षमता का विकास होता है, हमें  मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। तो अलग अलग मौसम में भी अलग अलग योग से हमें शारीरिक लाभ होते है। जैसे की गर्मी के मौसम में प्राणायाम या कुछ अन्य प्रकार के आसन करने से शरीर में गरमी का प्रकोप कम होता है।

 

 

Q) योग के प्रकार ?

योग के चार प्रकार और आठ अंग होते है। अब हम योग के प्रकार की बात करें तो राज योग, कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग।

 

How Alternative Medicine In India Can Help You Improve Your Health

Alternative Medicines In India

In a world full of pharmaceuticals, nature may sometimes help us heal from diseases, and this is where alternative medicine steps in. According to a review of research, over half of the people with chronic diseases use some form of complementary therapy at some point throughout their condition. There is no evidence to show that any sort of alternative medicine in India prevents or cures any disease, although it does aid in recovery and pain relief.

Alternative treatments are frequently used to help people feel better and cope with diseases and treatments. Many alternative therapies focus on relaxation and stress management. They may aid in relaxing of your emotions, relief of anxiety, and the improvement of your general sense of health and well-being. Positive emotions can benefit your health, according to many doctors and nurses.

What Is Alternative Medicine?

Alternative medicine refers to any type of treatment or therapy that differs from standard medical methods. In India, it refers to kinds of medicine that are not commonly acknowledged or practiced by medical experts, particularly those with less scientific evidence to back them up than more mainstream approaches. Some forms of alternative medicine have existed for hundreds or thousands of years. Others are rather new. Something that begins as an “alternative” therapy can sometimes become a standard treatment due to sufficient proof that it works and has no hazardous conditions.

Difference Between Alternative Medicine, Integrative Medicine, And Complementary Medicine

Alternative medicine

This term refers to medical systems or practices that serve as an alternative to mainstream medicine. An example of this would be someone who uses energy healing to cure an illness rather than traditional procedures.

Complementary medicine

Complementary medicine or therapy refers to methods used in addition to established medical procedures such as drugs, immunotherapy, chemotherapy, radiation therapy, and surgery. These traditional medical techniques are “complemented” by them. Non-conventional medical techniques are described as complementary or beneficial additions to conventional therapy. For example, a person suffering from migraines may take traditional pain relievers as well as attend biofeedback therapy. 

Integrative medicine

Integrative medicine takes into account your whole health and wellness, rather than confining the therapeutic approach to the individual disease or organs involved. It focuses on your health’s mental, emotional, functional, spiritual, social, and communal elements. This term refers to a medical approach that integrates conventional and non-traditional approaches in an evidence-based manner.

Types Of Alternative Medicines

Traditional medicine

Acupuncture, homeopathy, and Oriental treatments are examples of more popular and acceptable kinds of therapy. For centuries, these remedies have been used all across the world. Traditional medicine may include

Ayurveda

Ayurveda is a comprehensive healing system that originated thousands of years ago in India. According to Ayurvedic practitioners, everyone is made up of five elements: air, fire, water, earth, and ether. The way these components interact determines how the body functions.

Homeopathy

Homeopathy is almost 200 years old and originated in Germany. It is based on two theories: that “like heals like” and that the lower the dose, the more effective it is.

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Naturopathy

Naturopathy is a medical system that combines traditional and alternative medical treatments. It emphasizes the use of natural and harmless components. That includes treatments such as herbs, relaxation exercises, dietary adjustments, and massage, among others.

Body

Touch has been used in medicine since the beginning of time. Healing by touch is founded on the premise that an illness or damage in one portion of the body may impact the entire body. If the other areas of the body can be restored to full health by physical manipulation, the body may fully focus on healing the region of damage or sickness. The body’s and mind’s approaches are frequently mixed. Body therapy includes the following:

Chiropractic medicine

This therapy involves manipulating someone’s muscles, tissues, or bones in order to assist the body in healing from musculoskeletal problems or to help someone manage a condition that is causing pain.

Massage

During the massage, a practitioner kneads, rubs, or presses the body’s soft tissue with their fingers, hands, or equipment. It is an ancient treatment that has been used in most societies throughout history. Massage comes in a variety of styles, each with its own set of methods, rhythms, and body parts to target.

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Yoga

Yoga & meditation is a mind-body activity that has its roots in spiritual traditions. It consists of moving through a sequence of poses and stretches while concentrating on your breathing. Yoga is practiced by many individuals all over the globe to enhance mental and physical well-being.

Diet And Herbs

Man’s diet has changed over time from a basic diet of meats, fruits, vegetables, and grains to one that is frequently rich in fats, oils, and complex carbohydrates. Nutritional excess and insufficiency have become issues in today’s culture, both of which contribute to the development of chronic disorders. Many dietary and herbal therapies aim to restore the body’s nutritional imbalance. Among the dietary and herbal therapies that may be used are:

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Dietary supplements

Certain alternative medicines in India and integrative practitioners use nutritional supplements, such as vitamins, minerals, or other helpful chemicals, to cure or manage illnesses.

Herbal medicine

This involves using plants or plant components for medicinal purposes. There are several kinds of plants that are used to cure symptoms or illnesses.

Nutrition/diet

Dietary approaches to medicine involve the use of food to treat certain illnesses. This may imply consuming foods with specific medical characteristics, adhering to diets rich in specific nutrients, or avoiding some foods entirely.

External energy

Some individuals think that external energy emitted by objects or other sources has a direct impact on a person’s health. An example of external energy treatment is as follows:

Reiki

Reiki was developed in Japan. During Reiki sessions, practitioners use their hands to try to manage energy in the body. This may mean putting them on someone, slightly above them, or even working at a distance from them. The goal is to release trapped energy and boost the body’s inherent healing capacities.

Mind

Even mainstream or traditional medicine recognizes the potential of the mind-body link. People who have good emotional and mental health recover faster. Mind-body therapies may involve

Meditation

Meditation is a centuries-old practice found in faiths such as Hinduism and Buddhism. People may now experiment with a number of mindfulness meditations, some of which are religious in nature and others that are not.

Biofeedback

The use of equipment to assess unconscious or involuntary biological processes such as heart rate or muscle contractions is known as biofeedback. The information is then transformed by the device into vocal, visual, or physical sensations. The individual is then assisted by a therapist in learning to manage these signals.

Hypnosis

Hypnosis entails a person entering a spiritual level of relaxation and focusing on recommendations made by a clinician while in a hypnotic state. The recommendations are intended to assist in modifying a person’s emotional state, resulting in health advantages.

Best Alternative Medicine In India @ Nimba Nature Cure Village

Nimba’s philosophy of offering the greatest alternative medicine in India is simple: health and healing always come first. We at Nimba Nature Cure Village think that in order to achieve comprehensive health and inner growth, every individual needs to invest a substantial amount of time and effort into learning how to enhance their health and recover from the decade’s emerging health concerns. Healing and wellness are inextricably interwoven in our holistic paradise. Our whole healing and health improvement processes are built on an exquisite blend of today’s science, traditional practices, and ancient understanding. So, if you want to feel the holistic force of wellbeing, make your way to Nimba.

FAQs

Q1) Benefits of alternative medicine

Each type of alternative medicine may focus on a different area of your health. In general, it may offer one or more of the following health benefits:

  • Pain relief
  • It alleviates anxiety and tension
  • It alleviates nausea
  • It elevates one’s mood
  • Relaxation is increased
  • Enhances wound healing
  • It promotes sensations of happiness, joy, positivism, and inner calm
  • It relaxes the muscles
  • It also helps with fatigue
  • It promotes circulation and flexibility

Q2) Types of alternative medicine

Alternative medicine encompasses any sort of treatment or therapy that departs from mainstream medical practice. For millennia, these remedies have been utilized all across the world. Ayurveda, homeopathy, naturopathy, acupuncture, chiropractic, massage, yoga, meditation, herbal medicine, reiki, biofeedback, and other forms of traditional alternative medicine are examples.

 

 

How Can You Boost Your Immunity Using Naturopathy Treatment?

naturopathy treatments

The human body has the ability to heal itself. There is nothing the human body cannot do, from replacing a dead cell to healing a fracture. Allopathy’s whole approach revolves around using antibiotics to accelerate cell development in order to treat the wound. treatment comes into the picture and replaces the procedure by utilizing natural components. treatment is a straightforward procedure that focuses on the use of naturopathy treatments to restore the body. It emphasizes like herbs, massages, and acupuncture, as well as exercise and dietary guidance.

In 1800, the therapy reached the United States from Germany and subsequently expanded throughout the world. The therapy works by combining traditional and modern therapeutic approaches.

After the COVID-19 tragedy, we realized how important it is to care for our inner health as well as our outward body. We all take ourselves for granted and frequently neglect our health. We assumed that going to the gym and taking care of our skin was all we needed to do to boost our immunity and treat ourselves, but this was not the case. When things started going wrong, the year 2020 stepped in to remind us of the need for immunity, appropriate nutrition, and a healthy lifestyle. Naturopathy treatments have been shown to be everything we believed we wouldn’t need in the next hundred years.

  • First, the therapy is based on natural healing, which allows the body to revert to its natural healing roots and makes body cells stronger in the long term as compared to other forms of curative therapies.
  • Therapy does not treat a single disease; rather, it restores the full individual by addressing the body, soul, and mental health.
  • Self-healing therapy mixes a contemporary approach with traditional medication.
  • Finally, the doctor discusses with the patient for 1-3 hours and analyses the patient’s past and medical history, as well as their general personality, to aid in the long-term treatment of whatever they are suffering from.

Boost Immunity with Naturopathy Treatments

The primary goal of Naturopathy treatments is to empower the vital force to take care of health issues and use vital energy to enhance the body through a variety of approaches.

Disease Prevention

The therapy, which is regarded as the most successful approach to avoiding any disease, focuses on preventing the disease from developing in the first place. It focuses on the disease from the start of the field and revolves around the cure method afterward, all of which leads to a healthy body and immune system.

Treat Disorders

Minor disorders are the ones that find a residence permit in our bodies. Colds, migraines, headaches, as well as some dermatological issues and allergies, all indicate a poor immunity ratio. In the long run, this small sickness weakens the immune system.

The therapy begins by concentrating on what causes these problems in the first place, and then the treatment works its way to the core of the disease and addresses it with good nutrition.

Sleep disorder

We live in a society where people work from 9 a.m. to 5 p.m., followed by the other side of social media. All of this contributes to sleep difficulties. If not this, some people suffer from insomnia or hypertension, which leads us to disrupt our sleep cycle, which has a direct influence on our health. The better the health cycle, the better the sleep cycle.

Insomnia and other sleep-related illnesses can be effectively treated using naturopathic therapies. This is achieved via advanced training in therapeutic nutrition, herbal medicine, and behavioral medicine. As a result, treatments for restoring good sleep that is safe, natural, and effective have been developed.

Nimba Can Help You Create A Healthier Lifestyle

A person’s body will be healthier if he or she leads a better lifestyle. We tend to overlook the lifespan that has been created for us because we are too preoccupied with social media and junk food. The greenery and natural fresh air at Nimba Nature Cure Village aid in healing from within and prioritize overall well-being. From food to oil, water to air, mud to massages, the world of naturopathy offers everything to contribute to a healthy lifestyle, and they all lead to one thing in common: a boost in immunity.

Perhaps a vacation that strengthens your immune system is just what you need right now. That is why we are keeping our world of nature open for you to enjoy a vacation where you can boost your immunity and heal from within. Explore Immunization at Nimba, which can help you strengthen your immunity while on vacation. You’ll have a deeper connection to nature and a social distance from the diseases here at Nimba. For more information call +91 81550 12274 and talk to our specialist to know more about packages and services.

Care for your body after Chemotherapy treatment

Nimba Nature Cure Village
The term cancer is depressing in itself, but now days frequency of cancer survivorship has improved than from before. As per WHO, 2.25 million Indians are living with cancer, with over 1.1 million new cases being registered every year.
 
As per majority, cancer is a life-changing event. The painful journey of cancer begins from the day of diagnosis and continues until the final day of chemotherapy. Life after chemotherapy has its own challenges. It leaves long-term impact on your physical, mental, and spiritual well-being. Cancer is a deadly disease that affects people socially, emotionally, intellectually, and financially.
 
Cancer generally happens when the normal control mechanism of body fails and there is uncontrolled growth of abnormal cells in human body. Old cells remains and new abnormal cells develop uncontrollably. These abnormal cells in bulk develops tumor.
 
We are already aware of the fact that chemotherapy have its own negative effects. The drugs used in chemotherapy are used to kill the fast-growing cells of cancer. The chemotherapy drugs spreads all across the body which damages the healthy cells of body too. The side effect happens when healthy cells of body are damaged. Chemotherapy focuses just more than disease. Few side effects can be treated easily and some causes major problem. 
 
Following are the side effects commonly experienced by cancer patient:
  • Body ach and Fatigue
  • Insomnia
  • Mind-body restlessness
  • Hair loss
  • Easy bruising and bleeding, dry mouth, burning sensation 
  • Appetite change – weight gain or weight loss
  • Vomiting and nausea
  • Depression or Anxiety
  • Diarrhea and constipation 
  • Mood swings
  • changes in sexual desires
  • Fertility issues
  • sometime changes occurs in physical appearance also 
Traditional therapies such as radiation, chemotherapy, and surgery are really helpful in saving patient's life. Patients can expect better results with the combination of integrative therapy with such treatments. Combining traditional and alternative therapies is the best method for any cancer treatment, and it also helps to minimise the negative effects of chemotherapy and drugs used to treat cancer. Naturopathy, acupuncture, exercise, meditation, yoga, massage, diet and nutrition, and other techniques can significantly reduce cancer related chemotherapy side effects.
 
Our experts at Nimba health village recognise that everyone's mind and body work indifferently. Out doctors at Nimba health village come up with the effective combination of therapies to help patients cope with the most common side effects.
 
Supportive care services include:
  • Diet and Nutrition therapy help to restore digestive health, and prevent malnutrition and nutrient deficiencies, during and after cancer treatment. 
  • Naturopathy therapy promotes energy by enhancing natural ability of body to heal itself.
  • Acupuncture works by stimulate the body's specific points to alter the nervous system. It works best for physical pain relief, nausea and vomiting, dry mouth, etc.
  • Physical exercise to rebuild strength and overcome some of the physical effects of treatment
  • Mind-body medicine help to improve emotional well-being through promotes positive thinking, lowers stress, anxiety and depression, improves mental wellbeing, 
  • patient counselling help to deal with mixed emotions of daily life challenges that cancer can cause.
Cancer causes physical and emotional stress, so it’s critical to take care of yourself. Our aim behind 14th days cancer retreat at Nimba health village is to get rid of toxins that have accumulated in body during chemotherapy and also helps the body in improving its immune system. The mental and physical recovery is discussed in post – cancer retreat which is absent in traditional system. It generally aims at improving the life of patient by providing assistance in improving mental, physical and emotional well-being by reducing fear, anxiety and depression. This concept also helps in development of trust and personal skills.

Free the Chaos of your Mind with Meditation

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Peace. A state of mind that is longed for by all, but can be barely grasped by a few. There are several factors in our day-to-day life that practically grab the idea of peace by the feet and drag it out of our minds every time we even think of it. From work stress to social responsibilities, the distractions are endless. Not only does this make peace hard to achieve, but it also affects our mental and physical health.

Fortunately, there is one activity that can help you free the chaos of your mind: meditation. Being mindful and meditation induces a heightened sense of awareness and improves the attention span. Studies have shown that meditation can also help relieve stress and manage anxiety. Moreover, it improves memory as well.

The peacefulness attained by meditation lasts much longer than the process of meditation. This means that if stress appears at an unreasonable time, you will know the means of redirecting it. Meditation teaches you how to respond instead of reacting to challenging situations.

When meditation is combined with the power of mantra chanting, you can understand the magic of aligning all your chakras and influencing your nervous system. The vibrations created by meditation and mantra changing will eliminate any kind of negativity from your mind and free it from the chaos of everyday life.

At Nimba, we provide dedicated meditation spaces as well, called meditation caves, wherein you can connect with your inner self and have the utmost awareness of your existence.

You can choose to opt for Concentration Meditation, which aids in gaining absolute control over all mental turmoil and disciplines the mind to attract positive energies, or you can opt for Mindfulness Meditation, which obliges you to direct your focal point towards the random, tumultuous thoughts that grow in your mind naturally. This form of meditation allows you to explore the infinite possibilities of your mind and the freedom it experiences.

Whichever mode of meditation you choose, you will certainly find yourself to be more at peace and more in love with yourself and life, once you embrace the holistic development of your mind and soul at Nimba Nature Cure Village.