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इन्टरमिटन्ट फास्टिंग और स्वास्थ्य

इन्टरमिटन्ट फास्टिंग

उपवास के बारे में तो हम जानते ही है, धार्मिक ग्रंथो में इसके बारे में विस्तार से उल्लेख मिलता है। जैसे कि श्रीमद भगवद गीता में उल्लेख है की “विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिन” जिसका अर्थ है कि उपवास करने से हमें विषय विकारों से मुक्ति मिलती है। अगर इसे स्वास्थ्य के परिप्रेक्ष्य से देखे तो उपवास करने से हमें पाचन संबंधित कई तकलीफों से मुक्ति मिल सकती है। कम खाने से, कुछ अंतराल पर खाने से या नहीं खाने से हमारे पाचन अंगों का आराम तो मिलता है साथ ही हमारा पाचनतंत्र पहले से जमा हुई चर्बी का उपयोग करता है, जिसके कारण हमारा वजन भी कम होता है। हालांकि कई लोग उपवास करने में असमर्थ होते है जिसके कारण आजकल लोग इन्टरमिटन्ट फास्टिंग करना ज्यादा पसंद करते है।

क्या है इन्टरमिटन्ट फास्टिंग ?

इन्टरमिटन्ट फास्टिंग इस शब्द में ही उल्लेखित है कि नियमित अंतराल में खाना खाना। सामान्यतः लोग 12 घंटे में या उससे भी कम अंतराल में खाना खाते है। जिससे शरीर में चयापचय की क्रिया हमेशा चालु रहती है पर इन्टरमिटन्ट फास्टिंग में हम सामान्यत: 14 से 18 घंटे तक खाना नहीं खाते है। साथ ही इस प्रकार के फास्टिंग के दौरान डाइट में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे शरीर का वजन भी कम होता है।

इन्टरमिटन्ट फास्टिंग के प्रकार

जो लंबे समय तक भूखे नहीं रह सकते वो इन्टरमिटन्ट फास्टिंग से  स्वस्थ जीवन प्राप्त कर सकते है।

1)   16/8 मेथड 

इस प्रकार के इन्टरमिटन्ट फास्टिंग में लोग प्रतिदिन कम से कम 16 घंटे तक खाना नहीं खाते । व्यक्ति को अपना डायट ऐसे प्लान करना है की वह पूरे दिन के सारे मिल्स जैसे की लंच, डिनर 8 घंटे के अंदर ही ग्रहण करें । इस वजह से इसे 16/8  कहा जाता है। इस प्रकार के डायट के लिए आपको रात को 8 बजे अपना डिनर कर लेना है और दूसरे दिन सुबह 12 बजे से पहले कुछ नहीं खाना है। इस प्रकार के डाइट में आपको अपना ब्रेकफास्ट छोड़ना पडेगा। इतने लंबे अंतराल तक जब आप कुछ नहीं खाते है तो आप जीरो कैलोरी ड्रिंक जैसे की पानी, नींबू और शहद वाला गर्म पानी, ग्रीन टी जैसे पैय पदार्थ ले सकते है।

2)   5:2 मेथड 

अगर आप लंबे समय तक भूखे नहीं रह सकते है तो आप 5:2  प्रकार का डाइट भी अपना सकते है। जिसमें आपको सप्ताह में पांच दिन अपना सामान्य आहार लेना है जब की बाकी के 2 दिन आपको 500 से 600 कैलोरी से ज्यादा आहार नहीं लेना है। एक बात का खास ध्यान रखें की जिन दो दिन आप कम कैलोरी वाला खाना ले रहे है वो दोनो दिनों के बीच कम से कम एक दिन का अंतराल जरूर रखें।

3)   एक दिन खाने से परहेज़ मेथड  

इस प्रकार के डायट प्लान में आपको सप्ताह में एक या दो दिन पूरे 24 घंटे तक कुछ भी खाना नहीं खाना है। बाकी के दिनों में आप अपना सामान्य आहार ले सकते है।

4)   वैकल्पिक दिन पर उपवास मेथड 

अगर आप एक दिन छोड़कर एक दिन भूखे नहीं रह सकते तो आपको वैकल्पिक दिन पर उपवास कर सकते है। जिस दिन आप उपवास कर रहे है उस दिन आपको ज्यादा से ज्यादा 500 कैलोरी खाना खा सकते है।

 

इन्टरमिटन्ट फास्टिंग के फायदे

  • वजन घटाने में मदद करता है।
  • इस डायट से पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है।
  • रुक रुक के उपवास  करने से मनुष्यो के हार्मोन का स्तर अच्छा होता है।
  • इस प्रकार के उपवास से मस्तिष्क की कार्यक्षमता और भी अच्छी होती है।

 

इन्टरमिटन्ट फास्टिंग करने से कई स्वास्थ्य लाभ है पर कुछ शारीरिक अवस्थाओं में लंबे समय तक कुछ भी न खाना नई समस्याएं उत्पन्न कर सकती है। हम आपको कुछ ऐसे ही लक्षण के बारे में बताने जा रहे है वो अगर आपको दिखे तो आप तुरंत ही इन्टरमिटन्ट फास्टिंग रोक दे।

 

  • यदि आपको हाई कोलेस्ट्रॉल या लॉ एड्रेनल फंक्शन है तो आप इन्टरमिटन्ट फास्टिंग ना करें
  • अगर इन्टरमिटन्ट फास्टिंग करने वाली महिला गर्भवती है
  • आपका शरीर का तापमान कम रहता है
  • हाथ पांव ठंडा पड़ जाते हो
  • सुबह उठने में और रात को सोने में कठिनाई होती हो तो
  • आपके शरीर का शुगर लेवल कम रहता है
  • आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है
  • आपकी त्वचा सूखी हुए रहती है

 

 अगर आप उपरोक्त शारीरिक स्थिति से गुज़र रहे हो तो खुद से फास्टिंग करने का जोखिम न उठाए। आप किसी भी प्रकार के फास्टिंग करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य ले और कभी भी आपको लगे की शायद आपको कोई तकलीफ हो सकती है तो आप अवश्य किसी निष्णांत की सलाह लें। इस विषय में नींबा आपकी मदद कर सकता है।

 नींबा के साथ प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से कैसे रहे स्वस्थ ?

अगर आप अपने साथ कुछ समय व्यतीत करना चाहते है तो, नींबा नेचर केर आपके लिए एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प बन सकता है। नींबा लोगों को बेहतर और स्वस्थ जीवन जीने का पथ प्रदर्शित करता है। यहॉं शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्राकृतिक पद्धति से बेहतर बनाने का प्रयास किए जाते है। नींबा आपको प्रकृति के करीब ले जाती है, बिना किसी दवाई के प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति, योग और एक्यूपंक्चर की मदद से सर्वांगीक सारवार की जाती है। मनुष्य के शरीर में शक्तियां होती है कि वह किसी भी रोग के सामने अपने आपको हिल कर सकता है। ऐसी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों से नींबा आपका परिचय करवाता है। 

 अपने काम में व्यस्त रहने के कारण या कोई निजी कारण से एक लंबे अरसे तक अपने स्वास्थ्य की समस्याओं को अनदेखा कर रहे है और एक उम्र पर महंगे अस्पतालों में इलाज करवाने जाए इससे अच्छा है की हम आज से ही नींबा में आए, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति अपनाएं और अपने आप को स्वस्थ रखे।

  

 FAQ

16 घंटे के उपवास

अपने स्वास्थ्य के को ध्यान में रखते हुए या अपना वज़न कम करने के लिए कई लोग 16 घंटे के उपवास रखते है। जैसे की अगर आपने रात को आठ बजे अपना खाना खा लिया है तो दूसरे दिन सुबह 12 बजे के बाद ही खाना खाते है। इस प्रकार के उपवास में लोग, दोपहर 12 बजे से शाम के 8 बजे तक के समय में ही खाना खाते है। इसे कहते है 16 घंटे का उपवास।    

16 घंटे के उपवास लाभ

इन्टरमिटन्ट फास्टिंग  करने से से कई शारीरिक लाभ होते है, जिनमें से कुछ इस प्रकार से है। 

  •  पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  •  वजन घटाने में मदद करता है।
  •  व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है

गर्मियों में वज़न घटाने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा आहार ?

प्राकृतिक चिकित्सा आहार

“ मेरा वज़न कम नहीं हो रहा है ”, “कितनी भी महेनत करलूं पर कोई असर नहीं हो रहा है” “ में कितना भी मन मारलूं पर फर्क नहीं पड़ रहा ” ऐसी बातें अकसर लोग सोचते है और अपने आप पे ध्यान देना छोड देते है । हमारा खानपान और आधुनिक जीवन पद्धति के परिणाम स्वरूप कई लोगो में वज़न बढ़ने की या मोटापे की समस्या देखने को मिलती है। ऐसे तो यह कोई समस्या बड़ी नहीं है पर बढते वज़न के कारण आगे चलके हमें स्वास्थ्य संबंधित कई समस्यॉंए हो सकती है। इस लिए आज ही से अपने बढ़ते वज़न को रोकें, स्वास्थ जीवनशैली की और जाएं। स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता। प्राकृतिक चिकित्सा आहार के अनुसार खान पान की कुछ आदतों में बदलाव ला कर हम  बढते वज़न को रोक सकते है, जिसे हमें कई शारीरिक लाभ भी होते है।  

स्वास्थ्य वर्धक खानपान और व्यायाम करने के लिए सर्दियों के मौसम को सबसे अच्छा समय माना गया है पर सर्दियों के ठंडे वातावरण में शरीर को गरम रखने के लिए ज़्यादा उर्जा की जरूरत पडती है। शारीरिक उर्जा को बढ़ाने के लिए शरीर का मेटाबोलिक रेट बढ़ता है और व्यक्ति को ज्यादा भूख लगती है।  इस वजह से वजन कम करने की बात हो तो सर्दियों से ज्यादा गर्मियों को अच्छा समय माना जाता है।

अपने बी.एम.आई के बारे में जाने 

वज़न कम करने से पहले हर किसी को अपने बी.एम.आई के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

एक स्वस्थ व्यक्ति का वज़न उसकी ऊंचाई के परिपेक्ष्य में होना चाहिए। जीसे हम बॉडी मास इन्डेक्स के नाम से जानते है। यह एक आंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य मानक है। बॉडी मास इन्डेक्स वज़न और कद पर आधार रख़ते है।   

बी.एम.आई = वज़न (कि.ग्रा) / कद (से.मी) 

  • अगर आपका बी.एम.आई 18.5 से कम है तो आप जान ले की आपका वज़न कम है ।
  • आपका बी.एम.आई  18.5 से 24.9 के बीच आता है तो आपका वज़न सामान्य है।
  • अगर 25 से 29.9 के बीच बी.एम.आई आए तो ओवरवेईट है।
  • अगर आपका बी.एम.आई 30 से ज्यादा आए तो ओबेसिज़ है।

अपने कद के हिसाब से जान लें की आपका कितना वज़न ज्यादा है और जानकारी प्राप्त करके आप सुनिश्चित करें की आपको कितना वज़न कम करना है।   

 तो आज हम जानेंगे कैसे गर्मियों में कुछ खास प्रकार के खानपान की आदतों से वज़न कम कर सकते है।

ज़्यादा पानी पीए

सर्दियों में हमें ज़्यादा प्यास नहीं लगती है पर गर्मियों में धूप की वज़ह से हम बहोत जल्दी डि-हाईड्रेट हो जाते है, तो इस मौसम में हमें ज्यादा से ज्यादा पानी और तरल पदार्थो का इस्तमाल करना चाहिए। इस के अलावा कम कैलरी वाले पैय पदार्थ जैसे की नींबू पानी, ग्रीन टी, नारियल पानी इत्सादि का ज्यादा इस्तमाल करना स्वास्थवर्धक है। 

दहीं और छाछ का सेवन ज़्यादा करे 

गर्मिंओं के मौसम में ज्यादा मात्रा में शरीर से पानी पसीने के स्वरूप में बाहर निकल जाता है, साथ ही शरीर का तापमान भी ज्यादा रहेता है। ऐसे में आपको खाने में दहीं और छाछ का उपयोग ज्यादा करना चाहिए। दहीं आपके पाचनतंत्र को ठीक रखता है साथ इसमें प्रोबेक्टेरियल तत्व होते है जो बढ़ते हुए वजन को कम करते है। दहीं से तैयार होती छाछ में भी ये गुण होते है जो पाचनतंत्र को बहेतर बनाता है और पेट को ठंडक भी देता है। साथ थी दहीं से शरीर को मिलने वाले केल्शियम को कम कैसे अनदेखा कर सकते है।

ज्यादा खाने से करे परहेज़ 

प्राकृतिक चिकित्सा आहार पद्धति के अनुसार गर्मियों में हमेशा ज्यादा खाना खाने से परहेज करना चाहिए जिससे चयापचय की प्रक्रिया आसान हो जाती है। हो सके वहॉं तक थोड़ा थोड़ा खाना खाएं। अपने खानें में तरल पदार्थ, सब्ज़ीओं और फल का सेवन ज़्यादा करे। साथ ही हो सके तो अपना खाना एक साथ खाने की जगह उन्हे पुरे दिन में 5 थी 6 बार थोड़ा थोड़ा खाएं। जिससे खाना आसानी से पच जाए । 

सलाड़ खाना शुरु करें

जब आप अपना वज़न कम करना चाहते है, तो ये बेहद जरूरी है की आप खानें में फाईबर की मात्रा को संतुलित करें। हरी सब्जियॉं जैसे ककड़ी, गाजर, टमाटर और पत्ता गोबी जैसी सब्जियॉं का ताज़ा सलाड़ आप अपने खानें में जरूर से शामिल करें। सब्जियों में ज्यादा मात्रा में फाईबर होता है, यह फाईबर आपके पाचनतंत्र को ठीक रख़ता है साथ में आंतो में फसें कचरों को बहार निकालता है। यह लॉ कैलेरी फूड है जिससे आपका वज़न बेहद कम बढ़ता है।  

तरबूज खाएं

सारे फलों में तरबूज ऐसा फल है जिनमें 90% पानी होता है, इस लिए आप ये फल खाएं या फिर इसका ज्यूस बनाकर पीएं तो वो हमेशा आपको हाईड्रेट रखता है । साथ ही इस फल में केलरी बेहद कम होती है, इस वज़ह से आप कभी भी यह फल खाए तो आपका वज़न कभी भी बढ़ता नहीं है। इस लिए गर्मीओं में आप पेट भर के यह फल खाईए आपका वजन ख़ुद-बख़ुद कम हो जाएगा। 

 रोजाना करें ग्रीन टी का सेवन  

ज़्यादतर लोगों को चाई-कॉफी पीने की आदत होती है, इस आदत से आप अपने शरीर में काफ़ी ग्लुकॉज़ डालते है। अगर आप वज़न कम करना चाहतें है तो आप आज से ही ग्रीन टी पीना शुरू करें। ग्रीन टी में एंटीऑक्सिडन्ट का प्रमाण ज्यादा होता है। जिससे शरीर में मेटाबॉलिज्म तेज होता है और आप आसानी से वज़न कम कर सकते है। 

मोटे अनाज़ का खानें में करे इस्तमाल

अगर आप जल्दी से अपना वज़न कम करना चाहतें है और आप चाहतें है की आपका कम किया वज़न जल्दी से ना बढ़े तो प्राकृतिक चिकित्सा आहार पद्धति में उल्लेख है की आपको अपने खाने में मोटे अनाज जैसे की रागी,ज्वार, बाजरे का उपयोग बढ़ाना चाहिए। मोटे अनाज में फाइबर ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। जो आपके पाचन को बेहतर बनाता है, शरीर में ग्लूकोज का प्रमाण सामान्य करता है। रागी में हीमोग्लोबिन और कैल्शियम का प्रमाण ज्यादा होता है, साथ ही में यह डायबिटीज के दर्दीओं के लिए भी काफ़ी फायदेमंद है । बाजरा पेट को दुरुस्त करता है और हड्डियों को मजबूत बनाता है। 

यह कुछ आसान तरीके है जिससे आप अपने बढ़ते हुए वज़न को रोक सकते है। हर व्यक्ति का शरीर का प्रकार अलग होता है इस लिए वज़न कम करने के लिए आप विशेषज्ञ की मदद भी ले सकते है। जो आपको आपके शरीर के हिसाब से क्या खाना है, क्या नहीं ख़ाना वो बता सकते है। नींबा नेचर क्योर विलेज जो प्राकृतिक चिकित्सा आहार पद्धति से रोगों का निदान करता है और वह आपको बढ़ते वज़न को घटाने के विषय में ज्यादा जानकारी देने में समर्थ है। यहाँ आपको प्राकृतिक चिकित्सा आहार पद्धति के अनुसार खानपान की आदतों के बारे में विस्तार से बताया जाता है। खाने के साथ साथ कौन से व्यायाम और प्राकृतिक पद्धतियों से वज़न कम कर सकते है यह जानकारी आप नींबा नेचर क्योर विलेज से प्राप्त कर सकते है।  

  1. वज़न कम करने के घरेलू उपाय

वज़न करने के लिए कुछ घरेलु नुस्ख़े बहुत उपयोगी साबित हो सकते है। तो आओ जानते है उन चीज़ों के बारे में, 

  • जब भी प्यास लगें तब गरम पानी पीए 
  • खाने में हरी सब्ज़ी, सलाड और फल का सेवन करें
  • खानें में मोटे धान का इस्तमाल करें
  • एक साथ ज्यादा न खाएं 

2.  वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट

वजन कम करने के लिए खाने पीने की आदतों में नियमितता बेहद जरूरी है। यह कुछ सामान्य नुस्खे है जिससे आप अपना वज़न कम कर सकते है। 

  • सुबह उठकर और रात को सोने से पहेले गुनगुना पानी पिए, अगर चाहें तो नींबू और शहद भी डाल सकतें है।
  • 20 से 30 मिनट कोई भी शारीरिक व्यायाम करें।
  • नाश्ते में कम कैलोरी वाला पोहा, उपमा, कॉर्नफ्लेक्स खाएं। चाय और कॉफी की जगह पर आप ग्रीन टी का उपयोग करे।
  • दोपहर के खाने में सलाह, कम तेल में पकी हुई सब्जी, दाल, चावल और रोटी खाएं साथ ही छाछ और दहीं ले। 
  • शाम को चाय के साथ लाईट वेट बिस्कीट ले सकते है। 
  • रात में खाना खाने से पहले सूप पीएं।
  • खाना कम कैलोरी वाला घर बना ही खाना खाएं। 

फास्ट फूड,  तला हुआ, ज्यादा घी वाला खाना और कॉल्डड्रिंक्स न लें। शक्कर का इस्तेमाल हो सके उतना कम करें। दिन में जितना हो सके उतना गरम पानी पीएं। 

यह कुछ सामान्य तरीके है, जिससे की वज़न कम कर सकते है, पर कुछ शारीरिक अवस्थाओं में इन तरीकों से वज़न कम नहीं होता । ऐसी स्थिति में कोई भी बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह अवश्य लें।

3. वजन कम करने के लिए भोजन

खानपान में कुछ बदलाव करने से आसानी से वज़न कम कर सकते है, इसलिए अपने खाने में इस प्रकार के बदलाव आप कर सकते है। 

  • खाने मेंं हरी सब्जियां, फल का इस्तेमाल ज्यादा करें। 
  • दहीं और छाछ का सेवन करें ।
  • रागी, ज्वार, बाजरे जैसे मोटे धान का खाएं । 
  • शक्कर का इस्तेमाल कम करें, शक्कर की जगह पे गुड़ या शहद का प्रयोग करें।