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गर्मीओं में डिटॉक्सिफिकेशन द्वारा स्वास्थ्य को कैसे बना सकते है बेहतर

गर्मीओं में डिटॉक्सिफिकेशन द्वारा स्वास्थ्य को कैसे बना सकते है बेहतर

सामान्यत: आजकल हम लोग बाहर का खाने के नाम पर हम फास्टफूड बहुत खाते है। फास्टफूड हमारी जिव्हा को तो बहुत भाता है पर यह शरीर के अंदर कैसी असर उत्पन्न करता है उससे हम अनजान होते है। उपरांत ज्यादा तेल और चीनी खाने से भी शरीर में कई विषयुक्त पदार्थ इकठ्ठा होते है। इस प्रकार के आहार काफ़ी लंबे समय तक आपके शरीर में रहते है और शरीर में कई प्रकार के विकारों को जन्म देते है जैसे की अपच, अनिद्रा, तनाव इत्यादी इसके अलावा त्वचा, आंतो और कभी कभी फेंफड़ो में खाद्य पदार्थ और हानिकारक तत्व एकठ्ठा होते है। अगर एक लंबे वक्त तक खाद्य पदार्थ शरीर में रह गए तो वो सड़ जाता है और उससे कई बिमारीयॉं होती है। इस लिए समय समय पर शरीर में से सारे खाद्य पदार्थ निकल जाएं यह बेहद जरूरी है।  शरीर में से इन खाद्य पदार्थो को निकाल ने के लिए विषहरण यानि डिटॉक्सिफिकेशन करना बहुत जरूरी है  

क्या है डिटॉक्सिफिकेशन ?

विषहरण अर्थात्  डिटॉक्सिफिकेशन (Detoxification) के शब्द से ही हम जान सकते है की शरीर में से विषयुक्त पदार्थो को दूर करना। इस प्रक्रिया के बाद शरीर में से हानिकारक पदार्थ तो दूर हो जाते है साथ में वज़न कम होता है जिससे की हमारा स्वास्थ्य और भी बहेतर होता है। साथ ही डिटॉक्सिफिकेशन हमारे मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है। 

कैसे करेंगे डिटॉस्किफिकेशन ?

हमारे शरीर में से हानिकारक पदार्थों को निकाल के लिए उपयोग में ली जानेवाली पद्धति डिटॉक्सीफिकेशन इस प्रकार से किया जाता है। 

  • ज़्यादा पानी पीएं : अभी गर्मी का मौसम शरू हो चुका है और ऐसे वक़्त में ज्यादा पानी पीना स्वास्थ्य के लिए तो अच्छा है ही, क्योंकि इससे डिहाइड्रेशन नहीं होता है, शरीर का तापमान कम रहेता है, साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से जोड़ो कि चिकनाहट बरकरार रहेती है। योग्य मात्रा में पानी पीने से पाचन अच्छे से होता है । सामान्यत: हमें दिन में 8 – 12 ग्लास पानी पीना चाहिए ज्यादा पानी पीने से हमारे शरीर में उपस्थित हानिकारक पदार्थ पेशाब के माध्यम से बहार निकल जाते है। इसे शरीर में डिटॉक्सिफिकेशन की प्रक्रिया काफ़ी अच्छे से होती है।

 

  • व्यायाम करें : व्यायम करना स्वास्थ्य के लिए हमेशा से लाभकारी रहा है इससे हमारा शरीर स्वास्थ्य अच्छा रहेता है, हमारी हड्डीयॉं और स्नायु मज़बूत होते है साथ ही हमारा वज़न कम होता है। इस के अलावा भी व्यायाम करते समय हमे पसीना होता है जिसके माध्यम से हमारे शरीर में से हानिकारक पदार्थ भी बाहर आते है। यह भी डिटॉक्सिफिकेशन यानी विषहरण का एक महत्वपूर्ण भाग है। हालाकी इस के लिए आपको जिम में जाकर व्यायाम करने की जरूरत नहीं है आप जोगिंग, साइकलिंग, हेवी फ्लॉर एक्ससाइज कर सकते है या फिर आप किसी खेल के साथ जुड़ सकते है जिससे पर्याप्त मात्रा में व्यायाम भी हो जाएगा साथ ही पसिने के माध्यम से शरीर में से विषेल पदार्थ भी निकल जाएंगे।   

 

  • अच्छे से सोए :  हमारे लिए  पर्याप्त नींद होना बेहद जरूरी है एक स्वस्थ्य इन्सान के लिए 7 से 8 घंटे की नींद बहुत जरूरी है। कम सोने से हमारे मानसिक स्वास्थ्य असर पड़ता तो वहीं 8 घंटे की नींद से हमें मानसिक लाभ तो होती है साथ ही सेल्स रिकवर होते है जिससे हमारे शरीर को बेहतर तरीके से डिटोक्सीफाइ होने में मदद मिलती है। 

 

  • चाय को कहें अलविदा : आप सुबह उठकर सबसे पहेले चाय का सेवन करते हैं तो, इस आदत तो आज ही बदल दिजिए क्योंकी यह आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इस से बहेतर है आप सुबह उठकर गरम पानी में नींबू और शहद मिलाकर पी सकते है या फिर आप ग्रीन टी, नारियर पानी या ऐलोविरा ज्यूस भी पी सकते है। जो की आपको कई हानिकारक पदार्थो से दूर रखता है ।  

 

  • खाने में करें यह परिवर्तन : गर्मीयों में शरीर को ठंडा रखने के लिए और प्राकृतिक रूप से डिटॉक्सिफिकेशन करने लिए इन खाद्य पदार्थो का होना आवश्यक है। फलों का सेवन ज्यादा करें क्योंकि फलों में मौज़ुद एन्टीओक्सिडन्ट कोशिकाओं को नुकसान होने से बचा सकते है। फलों के साथ उबली हुइ हरी सब्जीयॉं भी खा सकते है जिससे शरीर में शुगर और फैट कम होता है। सब्जीओं के साथ आप ज्यादा मात्रा में ख़ीरा खा सकते है क्योंकि उसमें पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है ।  

 

यह कुछ सामान्य तरीके है जिससे आप के शरीर में से हानिकारक पदार्थ बहार निकल जाते है पर हमारे आर्युवेद में भी डिटॉक्सिफिकेशन के लिए कुछ पद्धतिओं का उल्लेख मिलता है। इन पद्धतिओं से हमारे शरीर में उत्पन्न होने वाले विकार यानि वात, पित्त और कफ़ को सरलता से शरीर से बाहर निकाला जा सकते है। हमारे शरीर के विकारों को दूर करने के लिए हम पूर्वकर्मा और पंचकर्म पद्धति अपना सकते है। 

 

पुर्वकर्मा :  इस पद्धति में शरीर पर तेल से मसाज किया जाता है , भांप दी जाती है और शीरोधारा किया जाता है। इन तीनो प्रक्रिया मे शरीर में मौजुद हानिकारक पदार्थ बाहर निकल जाते है।

 

पंचकर्म : आयुर्वेद में उल्लेखित इस प्राचीन पद्धति के द्वारा शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन गहेराई से होता है। इस वज़ह से यह पद्धति पांच विभागों में विभाजीत की गई है। 

  1. विरेचन – पाउडर, पेस्ट या अन्य माध्यम से शरीर के विकारों को दूर कीया जा सकता है
  2. वामन – उल्टी के माध्यम से शरीर की शुद्धि 
  3. बस्ती – मालिश और एनीमा के माध्यम से शरीर की शुद्धि
  4. रक्त मोक्ष – रक्त की शुद्धि
  5. न्यास – श्वसन तंत्र की शुद्धि 

योग और ध्यान :  

शरीर के साथ साथ मानसिक  डिटॉक्सिफिकेशन के लिए  योग और ध्यान बेहद जरूरी है। इससे हमारी चिंता और तनाव कम होता है, मन शांत होता है, नकारात्मक विचार कम हो जाती है, हमारी पॉंच इन्द्रियों के विकार दूर होते है और वह और बहेतर तरीकों से काम करते हैं और साथ ही हमारी रचनात्मकता भी बढ़ती है।  

अगर आप इस विषय में आप ज्यादा जानकारी चाहते है या मार्गदर्शन चाहते है तो आप निंबा नेचर क्योर विलेज का संपर्क कर सकते है। यहॉं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से निदान किया जाता है जो कई स्वास्थ्य लाभ देते है। निंबा नेचर क्योर विलेज, आपको ऐसा अनुभव देगा की जैसे आप प्रकृति की गौद में है, आपको अलौकिक शांति का अनुभव तो होगा साथ ही आपकी जीवन पद्धति में भी ऐसे परिवर्तन आएंगे जो आपको एक स्वस्थ जीवन देगा।

 

FAQs

Q) शरीर से विषैले तत्व बाहर कैसे निकाले

शरीर से हानिकारक या विषैले पदार्थो को बहार निकाल ने के हमें नियमित रूप से  डिटॉक्सिफिकेशन करना चाहिए। 

  1. आयुर्वेद की पद्धति पुर्वकर्म और पंचकर्म पद्धतिओं से शरीर में से विषैले पदार्थों को बहार निकाला जा सकता है
  2. खानपान की आदतों में बदलाव कर के भी शरीर से विषैले पदार्थो को बहार निकाल सकते है
  • ज़्यादा पानी पीएं
  • नियमित व्यायाम करें
  • खाने में फल और सब्जीओं का ज्यादा प्रयोग करें
  • सुबह चाय की जगह ग्रीन टी या  गरम पानी और शहद का प्रयोग करें

    3. योग और ध्यान का नियमित अभ्यास करें

Q) डिटॉक्सिफिकेशन क्या है

डिटॉक्सिफिकेशन एक प्रक्रिया है जिससे हम शरीर से विषैले पदार्थो को बहार निकाल सकते है और हमारा स्वास्थ्य बेहतर बना सकते है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत हमें हमारी खानपान की आदतों में और जीवनशैली में भी कुछ बदला करने होते है, साथ ही कुछ आयुवैदिक पद्धतिओं से भी हम डिटॉक्सिफिकेशन कर सकते है।

Q) Detoxification program / डिटॉक्सिफिकेश प्रोग्राम

डिटॉक्सिफिकेशन प्रोग्राम एक ऐसी प्रक्रिया है, जहॉं एक विशेषज्ञ आपको  इस विषय के बारे में जानकारी देते है की किस तरह आप अपने शरीर को डिटॉक्सिफाय कर सकते है, अगर आप डिटॉक्सिफिकेशन प्रोग्राम क बारे में ज़्यादा जानकारी चाहते है तो आप निंबा नेचर क्योर विलेज का संपर्क कर सकते है। जहॉं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतिओं से सारवार होती है।